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"फादर कामिल बुल्के"

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दोस्तों एक नाम आपने अक्सर सुना होगा "फादर कामिल बुल्के" ये नाम है उस शख्स का जो सन 1930 में बेल्जियम की एक चर्च में पादरी था , जिसे बेल्जियम से इसाई मसिनरियो ने भेजा था ,की जाओ भारत जाओ ,और उनके धरम की काट करके लोगो को इसाई बनाओ ,और वहाँ जा कर पहले उनके राम और कृषण को धयान से पढ़ लेना ,और फिर उनको इसाई बनाना। कामिल बुल्के भारत आया रामायण पढ़ी ,महाभारत पढ़ी ,तुसली , वाल्मीकि ,वेदव्यास सब पढ़ डाले . और रामायण पढ़ते पढ़ते एक चर्च का पादरी ,जो लोगो का धरम परिवर्तन कराने आया था ,इतना परभावित हुआ कि लोगो को इसाई बनाना तोह दूर खुद ही हिंदी और श्री राम का अनुयायी बन गया। "जीवनी,कृतियाँ,रामकथा : उत्पत्ति और विकास,फादर कामिल बुल्के एवं हिन्दी,बाहरी कड़ियाँ,संदर्भ" ये सब किताबें उसी कामिल बुल्के की हैं। दोस्तों ,ये रहा है भारत का इतिहास लेकिन शर्म आती है आज उन बेवकुफो पर जो इतने पुराने ,सत्य पर आधारित वैदिक हिन्दू धरम को छोड़ कर आज इसाइयत की तरफ जा रहे हैं . अरे ब्रिटनी स्पीयर्स (अंग्रेजी पॉप गायक ) जो अपने बच्चे को पैदा होते ही मंदिर में जाकर आशीर्वाद दिलवाती है ,उसी हिन्दू धर्म के लोग आज चर्चों में जा जा कर प्रेयर करवाते फिर रहे हैं। इससे शर्म की बात और क्या हो सकती है। और कामिल बुल्के ने तोह ये भी कहा की जिस देश का इतिहास इतना शक्तिशाली और अनुकरणीय हो और अगर उस देश के लोगो का मैं धरम परिवर्तन करा दूँ ,तो इनसे मुर्ख में दुनिया में किसी को नही मानूंगा . और देखो उसकी बात आज साच हो रही है। और जब उनको 1974 में पदम् भूषण दिया भारत सरकार ने तोह उन्होंने कहा था कि ‘''संस्कृत महारानी,, हिंदी बहूरानी और अंग्रेजी तो नौकरानी है। अब भई हमें तोह गर्व है उस संस्कृति पर ,उस वैदिक धर्म पर जिसका इतिहास इतना स्वर्णिम रहा हो।
#1
इतना परभावित हुआ कि लोगो को इसाई बनाना तोह दूर खुद ही हिंदी और श्री राम का अनुयायी बन गया। "जीवनी,कृतियाँ,रामकथा : उत्पत्ति और विकास,फादर कामिल बुल्के एवं हिन्दी,बाहरी
#2
Александр Блок НЕЗНАКОМКА По вечерам над ресторанами Горячий воздух дик и глух , И правит окриками пьяными Весенний и тлетворный дух . Вдал�
#3
jacki: इतना परभावित हुआ कि लोगो को इसाई बनाना तोह दूर खुद ही हिंदी और श्री राम का अनुयायी बन गया। "जीवनी,कृतियाँ,रामकथा : उत्पत्ति और विकास,फादर कामिल बुल्के एवं हिन्दी,बाहरी
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#4
jacki: Александр Блок НЕЗНАКОМКА По вечерам над ресторанами Горячий воздух дик и глух , И правит окриками пьяными Весенний и тлетворный дух . Вдал�
smiley

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