कà¥à¤¯à¤¾ आप जानते हैं कि...... इसà¥à¤²à¤¾à¤® में बà¥à¤°à¥à¤•े की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ और कैसे हà¥à¤ˆ है...????
दरअसल ... बà¥à¤°à¥à¤•े की कहानी जानने से पहले हमें आज से लगà¤à¤— १४०० साल पहले के अरब और मिसà¥à¤° को जानना होगा...!
यहाठयह ... यह सरà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¤¿à¤¤ है कि....... मà¥à¤¹à¤®à¥à¤®à¤¦ के समय अरब के लोग...... मà¥à¤¹à¤®à¥à¤®à¤¦ के सामान ही लà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‡, अयà¥à¤¯à¤¾à¤¶ और अतà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾à¤°à¥€ रहे...... और, उस समय औरतें बाजार में बिकती थी.
उस समय अरब की हालत यह थी कि...... हिनà¥à¤¦à¤¾ नाम की औरत ने तो अमीर हमजा का सीना चीरकर उसका कलेजा तक चबा लिया था.....!
इसके अलावा...... उस समय की अरबी औरते अनपढ़ ,अनà¥à¤§à¤µà¤¿à¤¶à¥à¤µà¤¾à¤¸à¥€ और मूरà¥à¤– थीं....!
यहाठतक कि.... इसà¥à¤²à¤¾à¤® के पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤ªà¤¾à¤¦à¤• और अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ के तथाकथित रसूल मà¥à¤¹à¤®à¥à¤®à¤¦ की à¤à¥€ सारी औरतें अनपढ़ थी ,और अधिकांश अनà¥à¤§à¤µà¤¿à¤¶à¥à¤µà¤¾à¤¸à¥€ थीं......इसलिठवे वासना पूरà¥à¤¤à¤¿ और अपना पेट à¤à¤°à¤¨à¥‡ के लिठमà¥à¤¹à¤®à¥à¤®à¤¦ के पास जाती थी....कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि..... उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ डर था कि कहीं उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ कोई लूट कर बेच न दे....!
लेकिन.... अब असली कारण और बà¥à¤°à¥à¤•े की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ पर आते हैं.....!
अबू बकर की à¤à¤• नौ साल की बेटी आयशा थी ....... तथा , मà¥à¤¹à¤®à¥à¤®à¤¦ की पहली पतà¥à¤¨à¥€ खदीजा मर चà¥à¤•ी थी...!
उस समय मà¥à¤¹à¤®à¥à¤®à¤¦ 54 साल का था ......जब उसकी नजर आयशा पर पड़ी....!
उसने अबू बकर को खलीफा बनाने का लालच दिया और उस छोटी सी मासूम बचà¥à¤šà¥€ आयशा से शादी का दवाब डाला.......आयशा को शादी के बारे में जà¥à¤žà¤¾à¤¨ ही नहीं था....!
इस पर .... मà¥à¤¹à¤®à¥à¤®à¤¦ की दासियाठआयशा को उठाकर मà¥à¤¹à¤®à¥à¤®à¤¦ के कमरे में ले गयीं...... और, मà¥à¤¹à¤®à¥à¤®à¤¦ ने उसका बलातà¥à¤•ार किया....!
आयशा चिलà¥à¤²à¤¾à¤¤à¥€ रही... और, रोती रही..... तथा उसकी आवाज दवाने के लिठऔरतें शोर करती रही .........सही मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤®-किताब8, हदीस-3309 & बà¥à¤–ारी-खंड 7, हदीस -65
जब तक मà¥à¤¹à¤®à¥à¤®à¤¦ अपनी मनमानी नहीं कर चà¥à¤•ा .... तब तक औरतें शोरमचाती रही ,ताकि किसी को पता नहीं चले कि कà¥à¤¯à¤¾ हो रहा है.....सही मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® -खंड 2 हदीस 3309